डायबिटीज़ (Diabetes)

डायबिटीज़ (Diabetes) या मधुमेह एक जान लेवा रोग है। अगर इसको मीठा ज़हर कहा जाए तो गलत नहीं होगा। यह एक ऐसी बीमारी है ,जो धीरे धीरे गुर्दों को, आँखों को, और नसों को ख़राब कर देती है। अगर इसकी सही समय पर जांच नहीं हो तो यह मनुष्य के जीवन को एक अंधकार में धकेल देती है।

सामान्य मनुष्यों में , जो हम खाते हैं वो ग्लूकोस (Glucose) बन जाता है। इन्सुलिन एक चाबी कि तरह ,इस ग्लूकोस को सेल्स के अंदर ले जाता है और सेल्स ग्लूकोस से ताकत लेते हैं।

मधुमेह में इन्सुलिन या तो बनता नहीं या फिर उसकी मात्रा बहुत कम होती है। जिसके परिणाम स्वरुप , अधिक ग्लूकोस कि मात्रा होने पर भी वो सेल्स (cells) के अंदर नहीं जा पाता। जब मनुष्य के सेल्स को ग्लूकोस नहीं मिलता, तो मनुष्य कमज़ोरी महसूस करता है। मनुष्य को अधिक भूख लगती है ,अधिक प्यास लगती है , और अधिक पेशाब आता है। 

मधुमेह दो प्रकार का होता है -टाइप १ (Type-1) और टाइप २ (Type-2)। दोनों ही टाइप खतरनाक होते हैं। यह बीमारी इतनी बड़ गयी है ,कि बच्चों को भी इसने अपनी चपेट में ले लिया है। 

सही समय पर मधुमेह कि जांच करवाना अति आवश्यक है। पर शुरू में इस बीमारी का पता नहीं चलता। इसी तरह कुछ साल बीत जाते हैं और तब तक यह बीमारी पूरे शरीर में अपनी जड़ें फैला देती है। 

आँखें ,गुर्दे,नसें सब ख़तम हो जाती हैं। इसलिए समय समय पर जांच करवाना बहुत ज़रूरी है। वैसे तो रक्त में ग्लूकोस कि मात्र से मधुमेह का पता चल सकता है। पर यह सही टेस्ट नहीं है। अगर बीते हुए दिन कुछ ज़यादा खाना खा लिया और फिर टेस्ट करवाया तो ग्लूकोस कि मात्रा बड़ी हुई आती है। इसलिए आजकल डॉक्टर्स इस टेस्ट को सही नहीं मानते हैं। सबसे उपयुक्त टेस्ट हीमोग्लोबिन ऎ १ सी (HbA1c) है। यह रक्त में पिछले तीन महीनों की ग्लूकोस मात्रा के बारे में बताता है। इसलिए यह बहुत ही उपयोगी टेस्ट है। 

बहुत कम लोग इसके बारे में जानते हैं और बहुत कम जगह इसकी जांच होती है। क्योंकि यह थोडा महंगा टेस्ट है और इसको टेस्ट करने के लिए बहुत तकनिकी लोग चाहिए, इसलिए यह टेस्ट हर जगह नहीं होता। 

स्वस्थ परिवार ही संपन्न परिवार है।

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